हमारे बारे में
फतेहपुरिया (राजगढ़िया) परिवार
✦ ✦ ✦फतेहपुरिया / राजगढ़िया परिवार के सभी सदस्यों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन
🕉️ जय श्री बालाजी 🕉️
श्री बालाजी, श्री लक्ष्मीनाथजी एवं हमारे पूज्य पूर्वजों के दिव्य आशीर्वाद से मुझे अत्यन्त हर्ष के साथ यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि वर्तमान वर्ष, विक्रम संवत् 2083, हमारे परिवार के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह वर्ष हमारे परिवार के लिए विशेष रूप से ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण है, क्योंकि इसी वर्ष हम राजगढ़, सादुलपुर, जिला चूरू (राजस्थान) स्थित हमारे परिवार मंदिर की 200वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं। यह अवसर हमारे समृद्ध इतिहास, संस्कृति एवं पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
इसी शुभ अवसर पर मुझे फतेहपुरिया / राजगढ़िया परिवार की वंशावली (Family Tree), परिवार निर्देशिका (Directory) एवं अनुक्रमणिका (Index) आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए अत्यन्त हर्ष हो रहा है। यह प्रयास हमारे परिवार की विरासत को सुरक्षित रखने तथा प्रत्येक सदस्य को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों को अपने परिवार, पूर्वजों, परम्पराओं एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर रखना है। आज के डिजिटल युग में, जब नई पीढ़ी जानकारी के लिए इंटरनेट पर अधिक निर्भर है, यह वेबसाइट हमारे गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगी।
मुझे यह बताते हुए अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है कि हमारी नई एवं आधुनिक रूप से पुनः डिज़ाइन की गई वेबसाइट www.rajgarhia.net का औपचारिक शुभारम्भ कल, दिनांक 29 जून 2026 (विक्रम संवत् 2083) को किया जाएगा।
इस वेबसाइट पर हमारे परिवार का इतिहास, मंदिर, वंशावली, पारिवारिक जानकारी, फोटो गैलरी तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध कराई गई हैं। वेबसाइट का अधिकांश भाग सभी के लिए खुला रहेगा, जबकि परिवार निर्देशिका (Family Directory) केवल पंजीकृत परिवार सदस्यों के लिए उपलब्ध होगी, जिसके लिए प्रत्येक सदस्य को एक विशिष्ट Login ID एवं Password प्रदान किया गया है।
यदि किसी सदस्य को अपना Login ID अथवा Password ज्ञात नहीं है, तो वे वेबसाइट के Contact Us पृष्ठ पर उपलब्ध Feedback Form के माध्यम से अथवा E-mail, SMS या WhatsApp द्वारा +91 90150-72536 पर संपर्क कर सकते हैं।
इस वंशावली एवं निर्देशिका को तैयार करने की प्रक्रिया अत्यन्त विस्तृत एवं समयसाध्य रही है। इसमें सम्मिलित अधिकांश जानकारी परिवार के विश्वसनीय एवं वरिष्ठ सदस्यों द्वारा उपलब्ध कराई गई है। मैं उन सभी परिवारजनों का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने अपना अमूल्य समय, सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान कर फतेहपुरिया / राजगढ़िया परिवार की ग्यारह पीढ़ियों का यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यद्यपि इस कार्य में पूर्ण सावधानी बरती गई है, फिर भी कुछ परिवारजन अपनी जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके कारण यह वंशावली एवं निर्देशिका अभी भी पूर्णतः सम्पूर्ण नहीं कही जा सकती। अतः मेरा सभी परिवारजनों से विनम्र अनुरोध है कि वेबसाइट पर लॉगिन करने के पश्चात अपनी जानकारी का अवलोकन करें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि, संशोधन अथवा नई जानकारी जोड़नी हो तो कृपया वेबसाइट के Contact Us पृष्ठ के माध्यम से अथवा सीधे Administrator को सूचित करें।
आपके बहुमूल्य सुझाव, टिप्पणियाँ एवं मार्गदर्शन हमारे लिए सदैव स्वागतयोग्य हैं। आपके सहयोग से हम इस पारिवारिक धरोहर को और अधिक समृद्ध एवं उपयोगी बना सकेंगे।
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि यह मंच हमारे परिवार की एकता, पारस्परिक प्रेम, सांस्कृतिक विरासत एवं पारिवारिक मूल्यों को आने वाली अनेक पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
आदरणीय बड़ों को सादर प्रणाम, छोटों को स्नेह तथा फतेहपुरिया / राजगढ़िया परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ।
सादर,
राजेन्द्र कुमार राजगढ़िया
17/905, Heritage City
एम. जी. रोड (एम. जी. रोड मेट्रो स्टेशन)
गुरुग्राम – 122002 (हरियाणा)
मोबाइल: +91 90150-72536
ई-मेल: admin@rajgarhia.net.in
फतेहपुरिया / राजगढ़िया परिवार की ओर से
परिवार का इतिहास
फतेहपुरिया (राजगढ़िया) परिवार — वंशावली एवं ऐतिहासिक विवरण
✦ ✦ ✦फतेहपुरिया (राजगढ़िया) परिवार गणपत राय जी राजगढ़िया का खानदान है। इस खानदान का मूल निवास स्थान राजगढ़ (बीकानेर राज्य) रहा है। यह परिवार अत्यंत प्राचीन, प्रतिष्ठित एवं सम्माननीय माना जाता है।
प्रारंभ में यह परिवार फतेहपुर में निवास करता था। उस समय भी यह परिवार धार्मिक, सामाजिक एवं प्रतिष्ठित लोगों में गिना जाता था। लगभग 200 वर्ष पूर्व सेठ श्री किशनदास जी फतेहपुर से राजगढ़ आए और वहीं स्थायी रूप से बस गए।
तभी से इनके वंशज राजगढ़ में निवास करते आ रहे हैं। यह परिवार राजगढ़ में फतेहपुरिया नाम से प्रसिद्ध हुआ। बीकानेर राज्य द्वारा इस परिवार को चौधरी की उपाधि प्रदान की गई।
परिवार द्वारा निर्मित हवेलियाँ, कुएँ, जोहड़, धर्मशालाएँ एवं मंदिर आज भी उनके गौरवशाली इतिहास के साक्षी हैं। बीकानेर दरबार द्वारा स्वर्ण कड़ा, नगाड़ा, झंडा एवं चंवर जैसे विशेष सम्मान प्रदान किए गए।